विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पदों के क्रम - निर्धारण को " रोस्टर " कहा जाता है। दरअसल रोस्टर का क्रम - निर्धारण ही मनुवादी है - पहले सामान्य, फिर ओबीसी, तब एससी और आखिर में एसटी। अर्थात हम पहले मजबूत तबकों को न्याय देकर फिर समाज के कमजोर तबकों को हिस्सेदारी दे रहे हैं।
यह रोस्टर संविधानवादी तब होगा, जब हम सामाजिक न्याय/ राष्ट्रनिर्माण का ख्याल रखेंगे - पहले एसटी, फिर एससी, तब ओबीसी और आखिर में सामान्य। अर्थात हम पहले कमजोर तबकों को न्याय देकर फिर समाज के मजबूत तबकों को हिस्सेदारी देंगे।
भारत की हर पद्धति में सूक्ष्म ढंग से मनुवादी विचार समाया रहता है। रोस्टर का क्रम- निर्धारण भी इसका अपवाद नहीं है। यह प्रकारांतर से वर्ण - व्यवस्था के हिसाब से है, न कि संविधान हिसाब से है। (फेसबुक से साभार)
यह रोस्टर संविधानवादी तब होगा, जब हम सामाजिक न्याय/ राष्ट्रनिर्माण का ख्याल रखेंगे - पहले एसटी, फिर एससी, तब ओबीसी और आखिर में सामान्य। अर्थात हम पहले कमजोर तबकों को न्याय देकर फिर समाज के मजबूत तबकों को हिस्सेदारी देंगे।
भारत की हर पद्धति में सूक्ष्म ढंग से मनुवादी विचार समाया रहता है। रोस्टर का क्रम- निर्धारण भी इसका अपवाद नहीं है। यह प्रकारांतर से वर्ण - व्यवस्था के हिसाब से है, न कि संविधान हिसाब से है। (फेसबुक से साभार)
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